Gurugram News : ‘मैं इस शहर में और नहीं रह सकता, भारत छोड़ रहा हूं’ जलभराव के बाद कुछ इस यूं लिखा अपना दर्द
यह घटना गुरुग्राम में रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया Reddit पर अपनी हताशा व्यक्त करने के बाद सामने आई है। उन्होंने जलमग्न सड़कों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिनमें गाड़ियां पानी में फंसी हुई दिख रही हैं

Gurugram News Network – गुरुग्राम, जिसे मिलेनियम सिटी भी कहा जाता है, इस मानसून में एक बार फिर जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। बारिश के पानी में डूबी सड़कें, थमते वाहन और घंटों का ट्रैफिक जाम – ये तस्वीरें अब आम हो गई हैं। इसी निराशा और गुस्से के बीच एक स्थानीय निवासी ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए एक ऐसी दर्द भरी पोस्ट लिखी जो देखते ही देखते वायरल हो गई। इस शख्स ने गुरुग्राम की बदहाल सड़कों और हर साल की जलभराव की समस्या से तंग आकर घोषणा कर दी कि वह अब भारत छोड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
यह घटना गुरुग्राम में रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया Reddit पर अपनी हताशा व्यक्त करने के बाद सामने आई है। उन्होंने जलमग्न सड़कों की तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं, जिनमें गाड़ियां पानी में फंसी हुई दिख रही हैं और पैदल चलने वालों को कमर तक गहरे पानी से गुजरना पड़ रहा है। इन तस्वीरों के साथ उन्होंने लिखा, “मैं इस शहर में अब और नहीं रह सकता। हर साल यही कहानी है। मैं भारत छोड़ रहा हूं।”
I am leaving India
byu/e9txinfinite ingurgaon
पोस्ट में ये लिखा

सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले ने लिखा – “मुझे समझ नहीं आ रहा कि गुड़गांव के लोग मानसून के मौसम में सड़कों की हालत को कैसे स्वीकार कर लेते हैं। कल रात, मैंने अपनी कार से उन्हें पार करते हुए, कम से कम 5 Imported कारों को जलभराव में फँसा हुआ देखा। यह पागलपन है। मुझे लगता है कि अमीर लोग/उद्योगपति सरकार को प्रभावित कर सकते हैं, दबाव डाल सकते हैं और उसकी समस्याओं को उठा सकते हैं… फिर भी उनमें से किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। वे इन व्यक्तिगत नुकसानों को कैसे स्वीकार कर रहे हैं?
जबकि हम जैसे लोग (निम्न, मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग), यथास्थिति को स्वीकार करते हैं। मुझे इस मौसम में अपनी कार बाहर ले जाने में डर लग रहा है, क्योंकि एक भी नुकसान मुझे बहुत महंगा पड़ेगा । यह उचित नहीं है कि हमें इन समस्याओं का सामना करना पड़े । इस समय सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता। न तो सत्ता में बैठे लोगों पर और न ही तथाकथित “विपक्ष” पर।

मैंने भारत छोड़ने का फैसला किया है, क्योंकि मैं अपनी ज़िंदगी इस तरह नहीं जीना चाहता। लोगों को संघर्ष करते हुए देखना और बुनियादी सुविधाएँ, कल्याण और सेवाएँ न मिलना । यह शायद एक आकस्मिक टिप्पणी है, लेकिन अब मैं नाराज हूं।”
इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया है। हजारों लोगों ने इसे देखा और अपनी प्रतिक्रिया दी है। कई यूजर्स ने गुरुग्राम की खराब बुनियादी सुविधाओं और अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था पर गुस्सा जाहिर किया है। यह पोस्ट गुरुग्राम नगर निगम और हरियाणा सरकार के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर क्यों हर साल मानसून में स्थिति इतनी बदतर हो जाती है।

‘मिलेनियम सिटी’ का ‘वॉटर सिटी’ में बदलना
गुरुग्राम को देश के प्रमुख कॉर्पोरेट हब और IT Hub के रूप में जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय कंपनियां और स्टार्टअप हैं। लेकिन, हर साल मानसून में यह शहर ‘मिलेनियम सिटी’ से ‘वॉटर सिटी’ में बदल जाता है। थोड़ी सी भी बारिश होती है तो सड़कें तालाब बन जाती हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
यह सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं है, बल्कि जलभराव के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, घरों और दुकानों में पानी घुस जाता है और आर्थिक नुकसान भी होता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है और केवल अस्थायी उपाय किए जाते हैं, जिनसे कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता।
बुनियादी ढांचे पर सवालिया निशान
इस वायरल पोस्ट ने एक बार फिर शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे के विकास पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या गुरुग्राम जैसा विकसित शहर भी बारिश के पानी को संभालने में सक्षम नहीं है? क्या सरकारें और स्थानीय निकाय केवल बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स का ऐलान करते रहेंगे, लेकिन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करेंगे?
यह घटना एक वेक-अप कॉल है कि अब समय आ गया है कि अधिकारी केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाएं। जल निकासी प्रणालियों का आधुनिकीकरण, अतिक्रमण हटाना और स्थायी समाधानों पर निवेश करना अब प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि गुरुग्राम के निवासी हर साल मानसून की इस त्रासदी से बच सकें। इस तरह की हताशा भरी पोस्ट्स यह दिखाती हैं कि लोगों का धैर्य अब जवाब दे रहा है।











